200 वर्ष पहले मुंसिफ को एक हजार, सदर अमीन को 500 रुपये तक के मुकदमे सुनने के मिले थे अधिकार
अब मजिस्ट्रेट और जज का पद संयुक्त था। इसी बीच 1811 को कचहरी को बिठूर स्थानांतरित कर दिया गया। 1816 में कचहरी वापस कानपुर आई और इस बार यह सूटरगंज और नवाबगंज के बीच बनी। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में कचहरी के भवन को नष्ट कर दिया गया थाfrom Jagran Hindi News - uttar-pradesh:kanpur-city https://www.jagran.com/uttar-pradesh/kanpur-city-21222731.html
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