ऐसा क्या हुआ था 1961 में कि रमई काका को लिखना पड़ा, सन इकसठ क्यार दिसंबर... Kanpur News

1961 में इससे कहीं ज्यादा पड़ा था जाड़ा आज भी बुजुर्गों को याद है नलों में जम गया था पानी पेड़ से मर कर गिरने लगी थींं चिडिय़ां।

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